बिंदुपथ (Locus)

प्रस्तावना (Introduction)

आपने कभी अपने चारों ओर कुछ अनोखे दृश्य अवश्य देखे होंगे।
 क्या आपको आकाश में अनायस ही कभी कुछ पक्षी एक विशेष आकृति बना कर उड़ते दिखाई दिए हैं? अथवा चीटियों का कोई समूह दीवार पर या अन्य सतह पर किसी निश्चिताकृति से विचरण करते हुए भी अवश्य देखा होगा।
इन जीवों के विचरण में प्रत्येक एक दूसरे से उस आकृति के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध जो उनके स्वभाव में हैं का पालन करते हैं।
यदि दोनों घटनाओं के अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक जीव को एक बिन्दु मान लें तो उनके द्वारा बनाई गई आकृति आवश्यक प्रतिबन्ध का पालन करने वाले बिन्दुओं का एक समुच्चय है।
वास्तव में ज्यामितीय आकृलियों में ऐसे वांछनीय प्रतिबंध युक्त बिन्दुओं के समुच्चय ही कुछ विशेष आकृति उभारते हैं,
अर्थात् शून्य में नीहित समस्त बिन्दुओं में से किसी आकृति केलिए उन सभी आवश्यक बिन्दुओं का समुच्चय है बिन्दुपथ है।

परिभाषा

बिन्दुपथ बिन्दुओं का एक विशिष्ट समुच्चय होता है जो किन्ही प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हैं।
इसे समझने के लिए हम कुछ उदाहरण लेते हैं:


  • मान लीजिए कि किसी तल में एक बिन्दु है तथा धनात्मक वास्तविक संख्या है। 
  • तल के उन बिन्दुओं से जो'O' से दूरी पर है.एक बिन्दु पथ बनता है। 
  • यह एक वृत्त है जिसका केन्द्र 0 तथा त्रिज्या है।



  • दो समांतर रेखाएँ और लीजिए। 
  • उन सभी बिन्दुओं पर विचार कीजिए जो ( औरसे समान दूरी पर हैं। 
  • उन बिन्दुओं से रेखा ॥ बनती है जो । और के समान्तर है तथा उनसे समान दूरी पर है।



  • अब मान लीजिए कि एक रेखा । तथा एक धनात्मक वास्तविक संख्या है। 
  • उन सभी बिन्दुओं पर विचार कीजिए जो । सेd दूरी पर स्थित हैं। 
  • यहाँ हमें । के समांतर व इससे दूरी पर दो रेखाएँ mऔर ॥ प्राप्त होती हैं

यह ध्यान देने योग्य है कि उपयुक्त तीनों स्थितियों में बिन्दु, विशेष प्रतिबंधों का पालन करते है।
अलग-अलग प्रतिबंधों से अलग-अलग बिन्दु पथ प्राप्त होते हैं।

अतः बिन्दुओं का बिन्दु पथ उन सभी बिन्दुओं का समुच्चय होता है, जो दी हुई एक या अधिक प्रतिबंधों का पालन करे।
ध्यान रहे कि इस परिभाषा में दो पूरक विचार शामिल हैं।
जो बिन्दु दी हुई शर्तो (प्रतिबंधों) का पालन करता है वह बिन्दु पथ का बिन्दु होता है

  1. बिन्दु पथ के प्रत्येक बिन्दु को दिए गए प्रतिबंधों का पालन करना अनिवार्य होता है।
  2. इस प्रकार विन्दु पथ व उसे निर्धारित करने वाले प्रतिबंध एक ही समझे जा सकते हैं। एक का वर्णन होने से दूसरे का भी बोध होता है।
  3. आइए अब हम दो महत्वपूर्ण बिन्दु पथों का अध्ययन करते हैं, जिनकी उपयोगिता अन्य प्रमेयों व ज्यामितीय रचनाओं में होगी।


दो दिए हुए बिन्दुओं से समदूरस्थ बिन्दुओं का बिन्दु पथ (Locus of points equidistant from two given points)


मान लीजिए कि A और B दो दिए हुए बिन्दु हैं।
P बिन्दु के बिन्दु पथ पर विचार करें जो प्रतिबंध AP=BP को संतुष्ट करता है।

यदि AB का मध्य बिन्दु है, तो AD=BD इसलिए भी विन्दु पथ पर स्थित है।
मान लें कि D के अतिरिक्त Pअन्य ऐसा बिन्दु है कि AP=BP. हम देखते हैं कि यदि PD को मिलाया जाए तो AP और BP क्रमशः दो त्रिभुजों ADP और BDP की भुजाएँ बन जाती है।
इन त्रिभुजों के संबंध में हम क्या कह सकते हैं? हम देखते हैं कि इनमें सर्वांगसमता की भुजा-भुजा-भुजा प्रमेय का पालन होता है।

अतः ADP = ABDP जिसमें ADP=XRDP यह सरलतापूर्वक सिद्ध किया जा सकता है कि ZADP = 90' या PD 1 AB अक्तः AB का लंब अर्द्धक PD हुआ।
PD को सरल रेखा कह सकते हैं। चूंकि A और BP समदूरस्थ है।
इसी प्रकार PD पर कोई अन्य बिन्दु ले तो भी A4 B से समदूरस्त सिद्ध होगा अर्थात PD पर स्थित सभी बिन्दु A व B से समदूरस्थ रहेंगें।
अतः उपर्युक्त विवेचन के आधार पर निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होता है।

प्रमेय-1 


  • दिए हुए दो बिन्दुओं से समदूरस्थ किसी बिन्दु का बिन्दु पथ उन्हें मिलाने वाले रेखाखंड का लम्बसमद्विभाजक होता है। 
  • (प्रमेय 1 का विलोम) दो दिए गए बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा के समद्विभाजाक पर स्थित बिन्दु दिए गए बिन्दुओं से समदूरस्थ होते हैं।


संगामी रेखाएँ

पिछली कक्षाओं में आपने त्रिभुज से सम्बन्धित कुछ जानकारियों प्राप्त की हैं जिनका इस अनुच्छेद में उपयोग होगा।
इनका यहाँ माध्यिका (Median) त्रिभुज के किसी शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य बिन्दु से मिलाने वाले रेखाखण्ड को त्रिभुज की मध्यिका पुनः स्मरण करना अनिवार्य है।

भुजाओं के लम्ब अर्द्धक या लम्ब समाद्विभाजक (Perpendicular bisectors): 

त्रिभुज की किसी भुजा के मध्य बिन्दु पर खींचा गया लम्ब, भुजा का लम्ब अर्द्धक कहलाता है।
3. कोणों के समद्विभाजक (Angle bisector) त्रिभुज के किसी कोण के समान दो भाग करने वाले रेखा खण्ड को त्रिभुज के कोण समद्विभाजक कहते हैं।

4. शीर्षलम्ब (Altitude): वह रेखाखण्ड जो त्रिभुज के किसी एक शीर्ष से सम्मुख भुजा पर लम्ब डालने से प्राप्त हो को त्रिभुज का एक शीर्षलम्ब कहते हैं।

5. संगामी रेखाएं (Concurrent lines) : तीन या तीन से अधिक रेखाएँ यदि एक ही बिन्दु से होकर गुजरें तो वे संगामी रेखाएँ कहलाती हैं।
इस स्थिति में उनका उभयनिष्ठ बिन्दु रेखाओं का संगमन अथवा संगामी बिन्दु (PointofConcurrency) कहलाता