दो चरो वाले रैखिक समीकरण एवं असमिकाए

निम्न बिन्दुओ से इसका हल होगा

  • किसी भी समस्या को हल करने के लिए उसे गणितीय रूप में निरूपित किया जाता है। 
  • हम जानते हैं कि समस्या एक या कई घटकों पर निर्भर होती है। 
  • पिछली कक्षा में हमने इस प्रकार की समस्याओं का समीकरण के रूप में निरूपण किया है। 
  • समस्या की स्थिति के अनुसार ये समीकरण एक चर दो चर या अधिक चरों पर आधारित होते हैं। 
  • यदि कोई समीकरण एक सरल रेखा को व्यक्त करता है तो रैखिक समीकरण कहलाता है। 
  • सामान्य रूप में x+ y %3 0, a # 0 जहां a, b वास्तविक संख्याऐं है, 
  • एक चर वाले रैखिक समीकरण को व्यक्त करता है। 
  • चर के जिस मान पर यह समीकरण संतुष्ट होता है उसे इस समीकरण का हल कहते है। 
  • एक चर वाले रैखिक समीकरण का आलेख किसी भी एक अक्ष के समान्तर रेखा होती हैं नवीं कक्षा में हमने दो चरों वाले रैखिक समीकरणों ar+by+c= 0; ab+0 के आंखों को बनाया है। 
  • तथा y के जिन मानों के लिए यह समीकरण संतुष्ट होता है वह युग्म इसके हल कहलाते हैं। 
  • दो चरों वाले रैखिक समीकरण का आलेख (ग्राफ) भी एक सरल रेखा होता है। 
  • इस सरल रेखा पर स्थित प्रत्येक बिन्दु (x, v) इस समीकरण के हल को व्यक्त करता है।


दो चरों वाले रैखिक युगपत समीकरण (Simultaneous Linear Equation of two variables) 


  • दो चरों वाली रैखिक समीकरणों का युग्म एक युगपत रैखिक समीकरण निकाय कहलाता है। 
  • उदाहरणार्थ 5x +2y=17; 27-5-1 या +2y=2-y=5 आदि। 
  • किसी भी रैखिक समीकरण युग्म को हल करना अर्थात उसके दोनों चरों के ऐसे मान प्राप्त करना जो युग्म की दोनों समीकरणों को संतुष्ट करते हैं। 
  • यहाँ हम रैखिक युगपत समीकरणों के हल की प्रकृति के बारे में निम्न उदाहरणों द्वारा समझते हैं।
  • यदि किसी युगपत समीकरण युग्म का हल ज्ञात किया जा सकता है 
  • चाहे वह अद्वितीय हो या अनेक हल प्राप्त हो तो इस प्रकार के रैखिक समीकरण संगत (consistent) युग्म कहलाते हैं 
  • और यदि हल प्राप्त नहीं होता है तो ऐसे युग्म असंगत (inconsistent) युग्म कहलाते हैं।


हम यहां उल्लेख करना चाहेंगे कि दो चरों वाले एक रैखिक समीकरण का आलेखन (ग्राफ) करने पर यह एक सरल रेखा प्राप्त होता है। 
अतः रैखिक समीकरण युग्म में दो सरल रेखाएँ एक समतल में प्राप्त होगी। 
जिनकी परस्पर स्थिति इस प्रकार हो सकती है।


  1. दोनों रेखाएँ एक बिन्दु पर प्रतिच्छेद करे।
  2. दोनों रेखाएँ प्रतिच्छेद नहीं करे अर्थात समान्तर हो।
  3. दोनों रेखाएँ एक दूसरे का ढके अर्थात् संपाती हो आइए इन स्थितियों को हम आलेखीय निरूपण द्वारा समझते है एवं रैखिक समीकरण युग्म को संगत या असगत होने पर दोनों रेखाएँ किस प्रकार दिखाई पड़ती है।

दो चर राशि वाली रैखिक असमिकाएँ

एक गणितीय कथन जिसमें चर एवं चिह>,<,या विद्यमान हो असमिका कहलाती है। 
असमिकाऐें एक चर वाली या एक से अधिक चर वाली हो सकती है। 
माना a एक अशून्य वास्तविक संख्या हैं तो चर.के लिए arth<0. ar+b50. ar+b>0 और ax + b 20 असमिकाएँ एक चर वाली रैखिक असमिकाएँ कहलाती है।



यदि चरों की संख्या दो हो तो असमिकाएँ दो चर वाली कहलाती है उदाहरणार्थ 2x +3y56x+ ).<4. व्यापक रूप में हम दो चर वाली रेखिक असमिकाओं को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं 
माना a, b दो अशून्य वास्तविक संख्याएँ है । 
और yचरों के लिए असमिकाएँ ax + by < c, ax + by <c, ax+ hy>০ या ax + hy2c दो चरों वाली रैखिक असमिकाएँ कहलाती है।

इस अनुच्छेद में हम दो चरों वाली रैखिक असमिकाओं को हल करने के बारे में पढ़ेंगे। 
इन असमिकाओं के कई हल संभव है। 
सभी संभव हलों के समुच्चय को ही एक असमिका का हल समुच्चय (Solution set) कहते हैं। 4.05 आलेखन विधि द्वारा दो चरों वाली रैखिक असमिकाओं का हल यहाँ हम दो चरोंx. y वाली रैखिक असमिकाओं का आलेखन विधि द्वारा हल करेंगे। 
निर्देशांक ज्यामिति में हमने पढ़ा है कि सरल रेखा ar+by=c, तल में ग्राफ पेपर पर-अक्ष एवं ) - अक्ष के सापेक्ष समीकरण को संतुष्ट करने वाले बिन्दुओं को मिलाने पर निरूपित होती है।

सरल रेखा ar+by =c.xy-तल को दो भागों में विभाजित करती है।

अर्थात ये विभाजित क्षेत्र ar+by c एवं ar+by 2 C द्वारा व्यक्त किये जा सकते है इन्हें संवृत एवं खुला अर्धआकाशीय क्षेत्रों के रूप में निम्न समुच्चयों से व्यक्त करते हैं। 
समुच्चय निरूपण में समुच्चय (x.y): ar+by =c) सरल रेखा, समुच्चय(x.y): ar+by sc) तथा {(x. ):ax +by2c} संवुत अर्ध आकाशीय क्षेत्र और समुच्चय (x,y):z+ by <ct तथा {(x,y): a + by>c) विवृत या खुला अर्ध आकाशीय क्षेत्र को दर्शित करते हैं।
 ये सभी अर्ध आकाशीय क्षेत्र असमिकाओंके हल समुच्चय कहलाते हैं। इस प्रकार की दो चरों वाली रैखिक असमिकाओं को ग्राफीय (आलेखन) विधि द्वारा निम्न चरणों में हल किया जा सकता है।
  • चरण-1 दी गई असमिका को समीकरण रूप में लिखिए यह एक सरल रेखा को व्यक्त करेगी। 
  • चरण-2: अब सरल रेखा के समीकरण में x=0 रखकर -अक्ष पर कटान बिन्दु प्राप्त कीजिए एवं y= 0 रखकर x - अक्ष पर रेखा के कटान बिन्दु प्राप्त कीजिए। 
  • चरण-3. उपरोक्त दोनों कटान बिन्दुओं को मिलाकर सरल रेखा का निरूपण कीजिए। 
  • चरण-4 अब एक बिन्दु (मूल बिन्दु भी हो सकता है) लेकर उसके निर्देशांकों के मान असमिका में रखते है।  यदि इस बिन्दु के निर्देशांक असमिका को संतुष्ट करते हैं तो सरल रेखा से लेकर बिन्दु की तरफ वाले क्षेत्र को छांयाकित कर दीजिए यही छायांकित क्षेत्र असमिका का अभीष्ट हल समुच्चय है। 
यदि मूल बिन्दु असमिका को संतुष्ट नहीं करता है तो छायांकित क्षेत्र रेखा से मूल बिन्दु की विपरीत होगा एवं यही क्षेत्र असमिका का अभीष्ट हल होगा।

किसी असमिका को हल करने की उपरोक्त विधि निम्न उदाहरणों से स्पष्ट समझी जा सकती है।