RBSE Class 10th Science Chapter 1 Notes and Video - भोजन एवं मानव स्वास्थ्य (Food and Human Health)

सन्तुलित व असंतुलित भोजन  (Balance and unbalance food) क्या है?

हमारे देश में कुपोषण का एक बड़ा कारण लोगों को सभी पोषक तत्वों से युक्त संतुलित भोजन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलना है। मगर कई उदाहरण ऐसे भी आते है कि बुरी आदतों के कारण संतुलित भोजन का उचित उपयोग नहीं हो पाता और व्यक्ति कुपोषण के लक्षण प्रदर्शित करने लगता है। कुपोषण का प्रभाव शारीरिक एवं मानसिक दोनों प्रकार की दुर्बलताओं के रूप में प्रकट होता है। यहाँ हम कुपोषण के कुछ प्रमुख प्रभावों की चर्चा करेंगे।

विटामिन कुपोषण (Vitamin malnutrition) किसे कहते है?

विटामिन भोजन का सूक्ष्म भाग होते हैं मगर कार्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं किसी एक या अधिक विटामिन की कमी होने पर उसके लक्षण स्पष्ट नजर आते हैं।

प्रोटीन कुपोषण (Protein malnutrition) क्या है?

गरीबी के कारण लोग भोजन में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में सम्मिलित नही कर पाते है और कुपोषण का शिकार हो जाते है ।

  • मुख्यतः छोटे बच्चे इससे प्रभावित होते हैं।
  • गर्भवती महिलाओं और किशोरावस्था में प्रोटीन आवश्यक पोषक है 
  • प्रोटीन की कमी से क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) रोग हो जाता है

क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) रोग के लक्षण?


  • बच्चे का पेट फूल जाता है
  • उसे भूख कम लगती है 
  • स्वभाव चिड़चिडा हो जाता है 
  • त्वचा पीली, शुष्क, काली, धब्बेदार होकर फटने लगती है। 

मरास्मस रोग (Marasmus) किसे कहते है?

जब प्रोटीन के साथ पोषण में पर्याप्त ऊर्जा की कमी होती है तो शरीर सूख कर दुर्बल हो जाता है आँखे कांतिहीन एवं अन्दर धंस जाती है इस स्थिति को मरास्मस रोग (Marasmus) कहते है।

खनिज कुपोषण (Mineral malnutrition) क्या है?


विभिन्न प्रकार के खनिज भी शरीर संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है तथा इनकी कमी से शरीर में कई प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं। लौह तत्व रुधिर के हीमोग्लोबिन का भाग होता है इसकी कमी से रक्त हीनता के कारण चेहरा पीला पड़ जाता है, कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है इसकी कमी से हड्डियां कमजोर व भंगुर प्रकृति की हो जाती है, आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि की क्रिया मंद पड़ जाती है. गलगंड (घेंघा) रोग हो जाता है।

पीने योग्य जल में निम्न गुण होने चाहिए

जल में आँखों से दिखने वाले कण और वनस्पति नहीं हो, हानि पहुँचाने वाले सूक्ष्म जीव नहीं हो, जल का pH संतुलित हो, जल में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन घुली हो। हमारा शरीर कई तरह की जिम्मेदारियाँ निभाता है जल इस काम में शरीर की मदद करता है शरीर की समस्त उपापचयी क्रियाएँ जल के द्वारा ही सम्पादित होती है। इसलिए डॉक्टर भी अक्सर मशवरा देता है की एक दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए। यदि आप शारीरिक श्रम ज्यादा करते हो तो आपको ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए। सही मात्रा में पानी पीने से शरीर का उपापचय सही तरीके से काम करता है। प्रत्येक दिन 8-10 गिलास पानी पीने से शरीर में रहने वाले जहरीले पदार्थ बाहर निकल जाते है, जिससे शरीर रोग मुक्त रहता है, शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी रहने से शरीर में चुस्ती और ऊर्जा बनी रहती है, थकान का अहसास नहीं होता है। पानी से शरीर में रेशो (फाइबर) की पर्याप्त मात्रा कायम रहती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बीमारियां होने का खतरा कम रहता है। प्रचुर मात्रा में पानी पीने से शरीर में अनावश्यक चर्बी जमा नहीं होती है, उचित मात्रा में पानी पीने से शरीर में किसी प्रकार की एलर्जी होने की आशंका कम हो जाती है, साथ ही फेफड़ों में संक्रमण, अस्थमा और आंत की बीमारियाँ आदि भी नहीं होती है। नियमित भरपूर पानी पीने से पथरी होने का खतरा भी टला रहता है, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने वाले को सर्दी जुकाम जैसे रोग नहीं घेरते है।

मोटापा (Obesity)

मोटापा वो स्थिति होती है जब अत्यधिक शारीरिक वसा शरीर पर इस सीमा तक एकत्रित हो जाती है कि वह स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने लगती है। यह संभावित आयु को घटा सकता है। शरीर भार सूचकांक (Body mass index:BMI) मानव भार व लम्बाई का अनुपात होता है जब 25 किग्रा/मी के बीच हो तब मोटापा पूर्व स्थिति और जब ये 30 किग्रा/भी से अधिक हो तो मोटापा होता है।
मोटापा बहुत से रोगों से जुड़ा है जैसे हृदय रोग, मधुमेह, निद्राकालिन श्वास समस्या, कई प्रकार के कैंसर और अस्थिसंध्यार्थी । मोटापे के कई कारण हो सकते है इनमें से प्रमुख है

मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना, ऊर्जा के सेवन और उर्जा के उपयोग के बीच अंसतुलन के कारण होता है। अधिक चर्वी युक्त भोजन करना, जंक फूड व कृत्रिम भोजन करना, कम व्यायाम और स्थिर जीवनयापन, शारीरिक क्रियाओं के सहीं ढंग से नहीं होने पर भी शरीर पर चर्बी जमा होने लगती है, अवटु अल्पक्रियता (हाइपोथायरायडिज्म) आदि।

रक्तचाप (Blood pressure) किसे कहते है?

रक्त वाहिनियों में बहते रक्त द्वारा वाहिनियों की दीवारों पर डाले गए दबाव को रक्तचाप कहते है। धमनियां वह नलिका है जो हृदय से रक्त को शरीर के सभी ऊतकों और अंगों तक ले जाती है। किसी व्यक्ति का रक्तचाप सिस्टोलीक डायास्टोलिक रक्तचाप के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है जैसे 120/80. सिस्टोलिक अर्थात ऊपर की संख्या धमनियों के दाब को दर्शाती है इसमें हृदय की मासंपेशियाँ संकुचित होकर धमनियों में रक्त को पम्प करती है, डायास्टोलिक रक्तचाप अर्थात नीचे वाली संख्या धमनियों में उस दाब को दर्शाती है जब संकुचन के बाद हृदय की मांसपेशियां शिथिल हो जाती है।

एक सामान्य व्यक्ति का सिस्टोलिक रक्तचाप पारा के 90 और 120 मिलीमीटर के बीच तथा डायास्टोलिक रक्तचाप पारा के 60-80 मिलीमीटर के बीच होता है. रक्तचाप को मापने वाले यंत्र को रक्तचापमापी (स्फाइग्नोमैनोमीटर) कहते है।

1733 में स्टीफन हेल्स ने पहली बार रक्तचाप घोड़ो में मापा, 1983 में कापलन ने रक्तचाप को परिभाषित किया।

निम्न रक्तचाप - वह दाव जिसमें धमनियों और नसों में रक्त का प्रचाह कम होने के लक्षण या संकेत दिखाई देते है । जब रक्त का प्रवाह काफी कम होता है तो मस्तिष्क हृदय तथा गुर्दे जैसी महत्वपूर्ण इन्द्रियों में ऑक्सीजन व पौष्टिक आहार नहीं पहुँच पाते है जिससे यह अंग सामान्य रुप से काम नहीं कर पाते है और स्थाई रुप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
उच्च रक्तचाप - धमनियों में अधिक दाब के कारण है। यह चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, भम, कई बार आवश्यकता से अधिक भोजन खाने से, मैदे से बने खाद्य पदार्थ, चीनी, मसाले, तेल, घी, अचार, मिठाइयाँ, मांस, चाय, सिगरेट व शराब के सेवन से, श्रमहीन जीवन व व्यायाम के अभाव से हो सकता है। उच्च रक्तचाप का समय पर निदान महत्वपूर्ण है।

ऐसे मरीजों को पोटेशियम युक्त भोजन करना चाहिए जैसे ताजे फल, डिब्बे में बंद सामग्री का प्रयोग बंद कर दे, भोजन में कैल्शियम (दूध) और मैग्निशियम की मात्रा संतुलित करनी चाहिए, रेशे युक्त पदार्थ खूब खाए, संतृप्त वसा (मांस. वनस्पति घी) मात्रा कम करनी चाहिए, इसके साथ ही नियमित व्यायाम करना चाहिए, खूब तेज लगातार 30 मिनट पैदल चलना सर्वोत्तम व्यायाम है, योग, ध्यान, प्रणायाम रोज करना चाहिए. धूम्रपान व मदिरापान नहीं करना चाहिए।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • पोषण जीवन का आधार है, शरीर के सुचारू संचालन हेतु संतुलित भोजन आवश्यक है 
  • भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज लवण की कमी से शरीर में रोग उत्पन्न हो जाते है।
  • जल ही जीवन है, जल दैनिक जीवन में बहुत से क्रियाकलापों हेतु आवश्यक है. 
  • दूषित जल द्वारा मानव में जंक फूड व कृत्रिम संश्लेषित खाद्य पदार्थ आकर्षक, खुशबूदार व स्वादिष्ट होते है, परन्तु इनसे मोटापा रक्तचाप, मधुमेह जैसे अनेक विकार उत्पन्न हो जाते है।